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सूखा आलूबुखारा

सूखा आलूबुखारा

क्या आप जानते हैं?
आलूबुखारे की खेती असंख्य किस्मों और हाइब्रिड के साथ समशीतोष्ण क्षेत्रों में प्रागैतिहासिक काल से ही अनेक प्रकार की मिट्टी और क्षेत्रों के लिए किया जाता रहा है। उनकी खेती काकेशस क्षेत्र की तलहटी के निकट पश्चिमी एशिया में और कैस्पियन समुद्र के तटों पर सबसे पहले की गई थी।1 अधिकतर वाणिज्यिक आलूबुखारा दो मुख्य प्रजातियों में आता है: Prunus domestica (यूरोपीय) और Prunus salicina (जापानी)।2 यूरोपीय आलूबुखारा वह प्रजाति है जो कि सूखे आलूबुखारों की फ्रेंच फसल का उत्पादन करती है, वर्तमान में यह सूखे बेर दुनिया भर के उपभोक्ताओं की पसंद है क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से मीठे और स्वाद से भरे होते हैं।
फसल कटने के बाद, ताज़ा काटे गए आलूबुखारे सुखा कर सूखे बेर या सूखे आलूबुखारे बनते हैं। हालांकि सभी सूखे आलूबुखारे आलूबुखारे होते हैं, लेकिन सभी आलूबुखारों का सूखे आलूबुखारों के रूप में उत्पादन नहीं किया जाता है। उत्तरी अमेरिका में, सूखे आलूबुखारा वे किस्में होती हैं जिन्हें सामान्य रूप से गुठली निकाले बिना सुखाया जाता है।2 सूखा आलूबुखारा
वर्तमान में, चिली, अर्जेंटीना और फ्रांस के साथ मिलकर यूएसए, सूखे आलूबुखारे के सबसे बड़े उत्पादक देश हैं, जिनका कुल वैश्विक उत्पादन में 95% हिस्सा है। 95%
लाभ
पोषक तत्व
सूखे आलूबुखारे में फाइबर, पोटेशियम, विटामिन ए और विटामिन के की मात्रा अधिक होती है, और वे तांबे के स्रोत होते हैं।3,4
विटामिन के
सभी सूखे मेवों में से, सूखे आलूबुखारों में सबसे अधिक मात्रा में विटामिन के होता है (59.5 एमसीजी/100 ग्रा)।
पाचन
पिछले दशक के दौरान सूखे आलूबुखारे के ऊपर शोध में वृद्धि हुई है क्योंकि उनका संबंध हड्डियों के स्वास्थ से है। सूखे आलूबुखारों को हड्डियों की हानि की रोकथाम और उसके ठीक होने से जोड़ा गया है, विशेष रूप से रजोनिव्रत्ति के बाद वाली महिलाओं में।5,6,7,8
पाचन स्वास्थ्य
वर्ष 2014 के अध्ययन के अनुसार, सूखे आलूबुखारे कब्ज हटाने में भी सहायता कर सकते हैं।9 वे अकेले ऐसे ताज़ा या निर्जलित फल हैं जिन्हें यूरोपीय खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (ईएफएसए) से पाचन स्वास्थ्य के ऊपर दावा करने के लिए अधिकार प्राप्त है।
मज़ेदार तथ्य
दक्षिण पश्चिमी फ्रांस में सबसे पहले आलू बुखारे के पेड़ 12वी सदी में यरूशलेम से दमिश्क क्षेत्र से धर्म योद्धाओं की वापसी पर लगाए गए थे। यह भी माना जाता है कि उस क्षेत्र में आलू बुखारे के पेड़ों का प्रसार टमप्लर के शूरवीरों द्वारा किया गया था। आज उस क्षेत्र में, आलू बुखारों को "Pruneau d’Agen" नाम से जाना जाता है।10
सूखा आलूबुखारा
लुइ पेलिअर, एक फ्रांसीसी बेल उत्पादक द्वारा गोल्ड रश के बाद आलू बुखारे कैलिफोर्निया लाए गए थे। वर्ष 1850 में, पेलिअर ने मिशन सैन होज़े के निकट आलू बुखारों की खेती आरंभ की थी। अब, आलू बुखारे कैलिफोर्निया राज्य की कृषि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।1
संदर्भ:

1)    California Dried Plums Association. http://www.californiadriedplums.org/about-prunes-and-dried-plums/history.
2)    Hui, Y. H. (2006). Handbook of fruits and fruit processing. John Wiley & Sons.
3)    USDA Food Composition Databases. National Nutrient Database for Standard Reference Release 28 slightly revised May, 2016: https://ndb.nal.usda.gov/ndb/search/list.
4)    Regulation (EC) No 1924/2006 of the European Parliament and of the Council of 20 December 2006 on nutrition and health claims made on foods: http://eur-lex.europa.eu/legal-content/EN/TXT/HTML/?uri=CELEX:32006R1924&from=en.
5)    Rendina, E., Hembree, K. D., Davis, M. R., Marlow, D., Clarke, S. L., Halloran, B. P., ... & Smith, B. J. (2013). Dried plum’s unique capacity to reverse bone loss and alter bone metabolism in postmenopausal osteoporosis model. PloS one, 8(3), e60569.
6)    Franklin, M., Bu, S. Y., Lerner, M. R., Lancaster, E. A., Bellmer, D., Marlow, D., ... & Smith, B. J. (2006). Dried plum prevents bone loss in a male osteoporosis model via IGF-I and the RANK pathway. Bone, 39(6), 1331-1342.
7)    Halloran, B. P., Wronski, T. J., VonHerzen, D. C., Chu, V., Xia, X., Pingel, J. E., ... & Smith, B. J. (2010). Dietary dried plum increases bone mass in adult and aged male mice. The Journal of nutrition, 140(10), 1781-1787.
8)    Hooshmand, S., Chai, S. C., Saadat, R. L., Payton, M. E., Brummel-Smith, K., & Arjmandi, B. H. (2011). Comparative effects of dried plum and dried apple on bone in postmenopausal women. British Journal of Nutrition, 106(6), 923.
9)    Lever, E., Cole, J., Scott, S. M., Emery, P. W., & Whelan, K. (2014). Systematic review: the effect of prunes on gastrointestinal function. Alimentary pharmacology & therapeutics, 40(7), 750-758.
10)    Amblard C. History of the Prune Industry in France. Comité Economique du Pruneau. International Prune Association. http://www.ipaprunes.org/pdf/History%20of%20prunes%20in%20France.pdf

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