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काजू

काजू

क्या आप जानते हैं?
काजू (Anacardium occidentale L.) उत्तर-पूर्व ब्राज़ील की उपज होता है। 16वीं सदी के दौरान, पुर्तगाली उसे ब्राज़ील से भारत (केरल और गोवा) और अफ्रीका में मोजाम्बिक और गिनी बिसाऊ जैसी पुर्तगाली कालोनियों में पहली बार ले गए। दक्षिण अफ्रीका, भारत और वियतनाम काजू के प्रमुख उत्पादक देश हैं। पूर्वी और पश्चिमी अफ्रीका भारत, वियतनाम और ब्राज़ील को कच्चे खोल वाले काजू का सबसे अधिक निर्यात करते हैं जिसका प्रसंस्करण वहाँ किया जाता है।
काजू के पेड़ को बहुत सारी सिंचाई या पानी के उपयोग की आवश्यकता नहीं होती है; यह पर्यावरण अनुकूल होता है क्योंकि इन पेड़ों का विकास खराब मिट्टी और शुष्क जलवायु में हो सकता है। इसका प्रयोग बड़े पैमाने पर वनीकरण कार्यक्रमों में किया जाता है क्योंकि इसके लिए लगभग किसी रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती है।1
काजू का सबसे ज्यादा उपभोग स्नैक्स, कच्चे, भुने हुए, नमकीन या फ्लेवर, सेंकी हुई सामग्री और कन्फेक्शनरी के रूप में किया जाता है। काजू का प्रयोग भारतीय मिठाइयों, स्वादिष्ट व्यंजनों और खाने में एक सामग्री के रूप में भी किया जाता है।
लाभ
पोषक तत्व
काजू में विटामिन के और लौह, मैग्नीशियम, फोस्फोरस, जिंक, मैंगनीज और तांबा जैसे खनिज बड़ी मात्रा में मौजूद होते हैं। वे फाइबर, थियामिन, पेंटोथेनिक एसिड और पोटेशियम और सेलेनियम जैसे खनिज के स्रोत भी हैं2,3
लौह
सभी नट्स में से, काजू में सबसे अधिक मात्रा में लौह होता है (6 मिग्रा/100 ग्रा)।
विटामिन के
विटामिन के सामान्य रूप से रक्त के थक्के के निर्माण और स्वस्थ हड्डियों में योगदान करता है।4
मज़ेदार तथ्य/h5>
काजू बाहर की ओर कैश्यु एपल नामक गूदेदार, नकली फल के नीचे लटकता है, जिसे मध्य अमेरिका में मैरानॉन के नाम से भी जाना जाता है।। एक बार पकने पर, कैश्यु एपल (जो सेब या नाशपाती के आकार का हो सकता है) पीला, लाल, नारंगी या गुलाबी रंग का हो सकता है। एपल को ताज़ा खाया जा सकता है या उसका जूस बनाया जा सकता है, और मादक पेय के उत्पादन के लिए आसुत किया जा सकता है।5
काजू के खोल में अखाद्य फेनोलिक तेल होता है, जो कैश्यु नट शेल लिक्विड (सीएनएसएल) के रूप में जाना जाता है, जिसके अनेक औद्योगिक प्रयोग हैं।3 सीएनएसएल कीटनाशी, कवकनाशी, दीमक-रोधी और औषधीय अनुप्रयोगों, अनेक प्रकार के प्लास्टिक निर्माण में एडिटिव के रूप में, साथ ही घर्षण सामग्रियों, ऑटोमोबाइल, सतह की कोटिंग, चिपकने वाले पदार्थों, लेमिनेट और रबड़ कम्पाउंडिंग, आदि के क्षेत्र में प्रयोग किये जाने रेजिन के निर्माण में उपयोगी होता है।6
वर्ष 2013 के अध्ययन में यह भी पाया गया कि सीएनएसएल निकालने के बाद काजू का खोल ऊर्जा सामग्री के संदर्भ में, इथेनॉल और मेथनॉल, साथ ही जलाऊ लकड़ी जैसे अनेक तरल इंधनों में सबसे बढ़िया था।7 काजू
संदर्भ:

1)    Papademetriou, M. K., & Herath, E. M. (1998). Integrated production practices of cashew in Asia. RAP Publication (FAO).
2)    USDA Food Composition Databases. National Nutrient Database for Standard Reference Release 28 slightly revised May, 2016: https://ndb.nal.usda.gov/ndb/search/list.
3)    Regulation (EC) No 1924/2006 of the European Parliament and of the Council of 20 December 2006 on nutrition and health claims made on foods: http://eur-lex.europa.eu/legal-content/EN/TXT/HTML/?uri=CELEX:32006R1924&from=en.
4)    Comission Regulation (EU) No 432/2012: http://eur-lex.europa.eu/legal-content/EN/TXT/HTML/?uri=CELEX:32012R0432&from=EN.
5)    INC (2015). Cashew Technical Information. http://www.nutfruit.org/wp-continguts/uploads/2015/11/FITXES-CASHEW-10-low.pdf.
6)    Lubi, M. C., & Thachil, E. T. (2000). Cashew nut shell liquid (CNSL)-a versatile monomer for polymer synthesis. Designed Monomers and polymers, 3(2), 123-153.
7)    Mwangi, P. M., Aule, C., & Thiong’o, G. T. (2013). Energy studies of some cashew nut by-products in Kenya. Int J Adv Res, 1, 880-887.